1. General Instructions (English)
  2. General Instructions (Hindi)

General instructions for Adult (type 2) Diabetes

Your diet, exercise, medicines and regular testing are the pillars of diabetes control. Long term uncontrolled sugars can lead to complications such as decreased vision, kidney failure and heart attacks. So, it is important to have good control of diabetes, and to treat high blood pressure, normalize body weight, do regular exercise and stop smoking.
  1. Diet: Regular and consistent diet is most important, with no feasts and fasts. Split your diet into 3-4 meals.Avoid sugar and sugar containing foods, and fried foods. Avoid fats (butter, oil, malai) and fat rich foods (puri, paratha, chat, namkeen etc.). Drink cows milk or toned milk, not buffalo milk.

  2. Exercise: Daily exercise is very important (for at least 30-45 minutes/day). You can exercise at any time of the day. Brisk walking is equally useful as more vigorous exercises.

  3. Medicines: Tablets prescribed by your doctor for diabetes control must be taken half an hour before meal. Do not forget to take meal after taking tablets, otherwise you may have a low blood sugar reaction.

  4. Insulin: Almost 50% of patients of type 2 diabetes will require insulin after 10 years. For being able to use insulin properly, you need to have some extra knowledge. You must arrange 2 or 3 meetings with our Diabetes Educator to learn how to use insulin properly.

  5. What is good blood sugar control: Ideally, your blood sugar should be between 80 to 120 mg% fasting or before meals. Two hours after any meal, it should be below 180mg%. Another very good test, which measures average sugar control over the previous 3 months, is called glycosylated haemoglobin or HbA1c. This is 4-6% in people without diabetes. Patients should try to keep it 6-7% or at the most 8%.

  6. Other Checkups: When you are diagnosed to have diabetes, you must have the following checkups, in addition to the full check up by the doctor or diabetes nurse (including blood pressure and feet examination) annually.

    1. Eye check up by retina specialist.
    2. Blood fats (cholestrol etc)
    3. Urine microalbumin, serum creatinine (kidney function tests)
    4. ECG (elecrocardiogram)
If these are normal, you must repeat these checkups once a year in the future.
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टाइप-2 मधुमेह (डाइबिटीज़) के मरीज़ों के लिये सामान्य निर्देश

महुमेह के अच्छे नियंत्रण के लिये खाने का परहेज़ , नियमित व्यायाम , औषधि और समय पर जाँच कराना आवश्यक है। अगर रक्त में शक्कर की मात्रा अधिक समय तक बढ़ी रहती है तो विभिन्न प्रकार की उलझनें हो सकती हैं। जैसे कि आखों में रोशनी का कम होना, गुर्दे की खराबी और दिल का दौरा पड़ना। इसलिये ये आवश्यक है कि मधुमेह में अचछे ब्लड शुगर नियंत्रण के साथ साथ रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और वज़न का उपयुक्त कन्ट्रोल रखें, नियमित व्यायाम करें और धूम्रपान ना करें
  1. आहार: खाने का परहेज़ नियम से रोज़ करना चाहिये। दावत और व्रत दोनों ही नुकसान दायक हैं। अपने दिन के भोजन को 3 - 4 भाग में बाँट लेना चाहिये। शक्कर, शक्कर से बनी चीज़ें और तली हुई चीज़ों को नहीं खाना चाहिये। घी, तेल, मक्खन और मलाई को कम से कम खाना चाहिये। इस विषय में सपरेटा दूध या गाय का दूध भैंस के दूध से बेहतर है।

  2. व्यायाम : मधुमेह में प्रतिदिन 30 से 40 मिनट का व्यायाम अत्यन्त आवश्यक है। यह किसी भी समय किया जा सकता है। तेज़ गति से चलना भी व्यायाम करने के समान लाभदायक है।

  3. मधुमेह के लिए औषधि: मधुमेह कि गोलियाँ खाने से आधा घंटे पहले लेनी चाहिये। गोलियाँ खाने के बाद भोजन अवश्य करना चाहिये अथवा ब्लड शुगर कम हो जाने से आपको परेशानी हो सकती है।

  4. इंसुलिन: टाइप-2 डाइबिटीज़ के 50% मरीज़ों को 10 साल की बीमारी के बाद इंसुलिन कि ज़रूरत पड़ती है। इंसुलिन को उचित ढंग से उपयोग करने के लिये इसके बारे में काफ़ी ज्ञान कि आवश्यकता होती है।

  5. अच्छा ब्लड शुगर कंट्रोल कया है? - आपका सुबह के खाली पेट और खाना खाने के पेहले के ब्लड शुगर 80 से 120 मिग्रा% होने चाहिये। खाना खाने के दो घंटे बाद ब्लड शुगर 180 मिग्रा से कम रहना चाहिये। एक और बहुत अच्छा टेस्ट जो पूर्व के तीन महीनों की औसतन ब्लड शुगर कंट्रोल के बारे में बताता है , ग्लाईकोसिलेटिठ हीमोग्लोबिन (हबा1स) के नाम से जाना जाता है। मधुमेह में इसे 7% से कम या अधिकतम 8% रखने कि कोशिश होनी चाहिये।

  6. अन्य चैकप और जाँच जो प्रत्येक वर्ष अवश्य करानी चाहिये:
    • प्रत्येक छ: महीने में रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) तथा पैरों की जाँच चिकित्सक या डाईबिटीज़ नर्स द्वारा होनी चाहिये।
    • नेत्र रोग विशेषज्ञ जो रेटिना के स्पेशलिस्ट हों , उनसे आँखों की जाँच करानी चाहिये।
    • खून में कोलेस्ट्रोल की जाँच।
    • मूत्र में माइक्रोएलब्यूमिन व खून में क्रिटेनिन की जाँच। यह गुर्दे सम्बन्धित जाँचें हैं।
    • ई सी जी (दिल से सम्बन्धित जाँच)
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